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संरचनावाद और उत्तर-संरचनावाद का सिद्धांत

इस पोस्ट में हम लोग संरचनावाद तथा उत्तर-संरचनावाद क्या है?, उत्तर संरचनावाद की मुख्य विशेषतायें , संरचनावाद तथा उत्तर-संरचनावाद पर फोकाल्ट के विचारों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। आदि प्रश्नों पर चर्चा करेंगे।

 

संरचनावाद और उत्तर संरचनावाद का सिद्धांत

 

संरचनावाद क्या है?

सामान्य शब्दों में, सामाजिक संरचना या ढांचे से सम्बन्धित विद्वानों और समाजशास्त्रियों के विचारंश के संकलने को ही संरचनावाद(Structuralism) कहते है। यह एक बौद्धिक आन्दोलन है, जिसकी जडे फ्रांसीसी समाजशास्त्र में निहित है, इन समाजशास्त्रीय विद्वानों ने मार्क्स, दुर्खीम एवं लेवी स्ट्रास, आदि ने संरचनावाद की अपनी-अपनी व्याख्याओं में सामाजिक सम्बन्धों और क्रियाओं को सम्मिलित किया है, जो एक लम्बे समय तक समाजों में चलते रहते हैं, किन्तु यूरोप के कुछ अन्य संरचनावादी विद्वान इस मत से असहमत है, क्योंकि उनका विचार है कि लोग जो कहते हैं और जिस तरह से सोचते हैं, वही उनके व्यवहार को प्रभावित करता है कि लोग जो कहते हैं और जिस तरह से सोचते हैं, वही उनके व्यवहार को प्रभावित करता है। इसलिए भाषा तथा विचार ही सामाजिक संरचना की परिभाषा है। रूस वैलेस के विचार से विश्व के बारे में हमारा जैसा अनुभव होगा, सामाजिक संरचना भी वैसी ही होगी।

 

उत्तर संरचनावाद या नव-संरचनावाद

उत्तर संरचनावाद या नव-संरचनावाद का जन्म समाजशास्त्र में संरचनावाद तथा प्रकार्यवाद के दोषों के कारण हुआ है। इसमें संरचनावाद एवं प्रकार्यवाद के दोषों को दूर करनै का प्रयत्न किया गया है। संरचनावाद की कमियों के कारण कुछ समाजशास्त्रियों ने इसे अस्वीकार कर दिया तथा कुछ ने इसे संशोधित करके पुनः स्थापित करने का प्रयास किया। इसे ही उत्तर संरचनावाद कहा गया। लेमर्ट ने उत्तर संरचनावाद के प्रतीक के रूप में इसकी जन्म तिथि 15 जुलाई 1972 समय 3.32 शाम को घोषित किया। इस समय पेरिस में आधुनिक शिल्पकला की प्रतीक प्रुईट इगो नाम की आवसन परियोजना को नष्ट कर दिया गया था।

उत्तर संरचनावाद की मुख्य विशेषतायें

उत्तर संरचनावाद की मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित है-

1. उत्तर -संरचनावाद  का जन्म परम्परागत संरचनावाद में संशोधन के परिणामस्वरूप हुआ है। यह उत्तर-आधुनिकता से प्रेरित एवं प्रभावित है।

2. उत्तर-संरचनावाद व्यक्तिनिष्ठा के बजाय वस्तुनिष्ठ पर बल देता है।

3. यह संरचनावाद को विस्तृत स्वरूप प्रदान करता है। यह कई दूसरे सैद्धान्तिक परिप्रेक्ष्यों को भी स्वयं में स्थान प्रदान करता है।

4. उत्तर-संरचनावाद वस्तुनिष्ठता पर जोर देता है।

5. परम्परागत संरचनावाद आधुनिक विश्व का अध्ययन करता है, जबकि उत्तर संरचनावाद उत्तर आधुनिक विश्व की समस्याओं का विवेचन करता है।

6. उत्तर -संरचनावाद समाज में एकता के बजाय विभिन्नता की खोज करते हैं। इनका विश्वास है कि समाज की संरचना विभिन्नता में निहित होती है।

7. उत्तर संरचनावाद समाज के गरीब एवं पददलित वर्गों की उपेक्षा नहीं करता है, अपितु उनको उठाने का प्रयास करता है।

8. उत्तर संरचनावादी भाषा विज्ञान को अपने विश्लेषण का आधार बनाते हैं।

 

माइकेल फोकाल्ट का संरचनावाद एवं उत्तर-संरचनावाद

माइकल फोकाल्ट को एक प्रबुद्ध फ्रांसीसी विचारक के रूप में जाना जाता है। आपका लेखन संरचनावाद एवं उत्तर संरचनावाद दोनों से सम्बन्ध रखता है। इनके लेखन की यह विशेषता है कि यह बहुआयामी है। आपकी कृतियां समाजशास्त्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य समाज विज्ञानों में भी आपका हस्तक्षेप है। एक तरफ जहां इन्होंने पागलपन और औषधि शास्त्र पर अध्ययन किया है वहीं दूसरी तरफ आपने अपराध तथा सेक्स के सामाजिक नियंत्रण पर भी कार्य किया है।

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फोकाल्ट के लेखन पर कई विचारकों का प्रभाव ट्रॅष्टिगोचर होता है। कार्ल मार्क्स का प्रभाव आपके उत्तर संरचनावाद में परिलक्षित होता है। ये मार्क्स के ज्ञान के समाजशास्त्र से सहमत थे, किन्तु मार्क्स के आर्थिक व्यवस्था सम्बन्धी विचार से असहमत थे। फोकाल्ट मैक्सवेबर के तार्किक सिद्धान्त से भी प्रभावित थे। इनके ऊपर प्रमुख दार्शनिक नीत्से का अधिक प्रभाव था। नीत्से की शक्ति और ज्ञान की अवधारणा को आधार बनाकर आपने उत्तर संरचनावाद का निर्माण किया । फोकाल्ट उत्तर संरचनावादी के साथ उत्तर आधुनिकतावादी कहा जाता है।

फोकाल्ट की विमायें या दिशाएं

फोकाल्ट का विज्ञान, ज्ञान, बातचीत एवं प्रवचन आदि की अनेक विधाओं पर अधिकार था। अपनी बाद की कृतियों में वह शक्ति के उदगम और विकास की परम्परा का अध्ययन करते हुए पाये जाते हैं। किस प्रकार व्यक्ति स्वयं तथा दूसरों पर शासन करते हैं? इस प्रश्न के उत्तर में आप कहते हैं कि निश्चित रूप से प्रजा या जनता पर जो शासन किया जाता है उसका माध्यम ज्ञान एवं उसकी उपज है। समाज में कुछ व्यक्ति प्रजा पर शासन करने के लिए शक्ति को मानते हैं। फोकाल्ट का विचार है कि जिस व्यक्ति के पास  जितना ज्ञान होता है उसकी शक्ति उतनी ही प्रभावी होती है। आप अपराध सेक्स अथवा पागलो से सम्बन्धित अपनी समस्त रचनाओं में उस ज्ञान की खोज करते हैं जो शक्ति प्रदान करता है। फोकाल्ट ने शक्ति के उद्गम एवं विकास पर जिस कार्य को किया उसे पति की वंशावली कहा जाता है। इनका कथन है कि ज्ञान के आधार पर ही व्यक्ति शासन करते हैं। फोकाल्ट ज्ञान के संस्तरीकरण का विरोध करते हैं। इनकी ज्ञान से प्राप्त तकनीकी रुचि हैं। ये यह जानना चाहते है कि विभिन्न संस्थायें व्यक्तियों पर शक्ति का प्रयोग करने के लिए इन तकनीकों का प्रयोग किस प्रकार करती है। फोकाल्ट इस तथ्य से सहमत नहीं है कि शक्ति के प्रयोग के पीछे अभिजात्य व्यक्तियों का कोई षड्यन्त्र होता है। फोकाल्ट ने पुनर्जागरण काल से लेकर आधुनिक युग तक में ज्ञान एवं शक्ति के पारस्परिक सम्बन्धों का विवेचन किया है।

फोकाल्ट का विवेचन उत्तर संरचनावाद क्यों है?

हालांकि, फोकाल्ट महोदय ने सामाजिक जगत के अनेक पक्षों पर अपने विचार रखे है, किन्तु आपका कार्य संरचनावाद से आगे की बात रखता है, इसीलिए इनके कार्य को उत्तर संरचनावाद कहा जाता है। यही कारण है कि इन्हें उत्तर संरचनावाद का प्रतिनिधि कहा जाता है। उत्तर संरचनावाद परम्परागत संरचनावाद से भिन्न है। यह व्यक्तिनिष्ठता के बजाय वस्तुनिष्ठता को स्वीकार करता है। यह वर्तमान जगत की समस्याओं के बजाय उत्तर आधुनिक समाज की समस्याओं के विश्लेषण में रुचि रखता है।

 

संरचनावाद किस बात पर बल देता है?

संरचनावाद के अनेक दोषों के चलते अनेक समाजशास्त्रियों ने इसे अस्वीकार कर दिया। कुछ समाजशास्त्रियों ने संरचनावाद में सुधार करके उसकी कमियों को दूर किया तथा उसे पुनः स्थापित करने की कोशिश की जिसे उत्तर संरचनावाद का उद्भव परम्परागत संरचनावाद को विस्तृत कलेवर प्रदान करता है। इसमें कई दूसरे सैद्धान्तिक परिप्रेक्ष्यों को भी शामिल किया गया है। उत्तर संरचनावाद समाज के दलित उपेक्षित एवं पद दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। इसके समर्थक समाज में एकता के स्थान पर विभिन्न की खोज करते हैं। उत्तर संरचनावाद के सम्बन्ध में फोकाल्ट के योगदान को देखते – हुए कहा जा सकता है कि इसके वास्तविक जनक आप ही हैं।

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स्पष्ट है कि फोकाल्ट ने संरचनावाद तथा उत्तर-संरचनावाद दोनों ही विषयों पर अपने महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किये हैं। फोकाल्ट मार्क्स के विचार, घटनाशास्त्र, वेबर के तार्किक सिद्धान्त, नीत्शे के शक्ति और ज्ञान से काफी प्रभावित हुए थे। वह एक पारंगत सिद्धान्तवेत्ता थे, जिन्होंने शक्ति और ज्ञान के सम्प्रत्यय को ग्रहण कर उत्तर-संरचनावादी सिद्धान्त का निर्माण किया। फोकाल्ट के अनुसार, समाज में कुछ लोग जनता पर शासन करने के लिए ज्ञान और शक्ति खोजते हैं, जो कि उन्हें शासन करने के योग्य बनाती है। फोकाल्ट के अनुसार, उत्तर संरचनावाद का आधार वास्तव में ज्ञान की शक्ति ही है। जिस व्यक्ति के पास जितना अधिक ज्ञान होता है, उसकी शक्ति भी उतनी ही अधिक प्रभावशाली होती है। वह ज्ञान के सोपानीकरण के विरोधी और ज्ञान से प्राप्त तकनीकी में रुचि रखते है। वह अपने सम्पूर्ण कृतित्व चाहे वह अपराध, सेक्स या पागलों से सम्बन्धित है, सदैव ही उस ज्ञान की खोज करना चाहते हैं जो शक्ति प्रदायक होता है।

सामाजिक संरचनावाद का उद्देश्य समाज में एकीकरण उत्पन्न करना है, जिसके लिए समूह और व्यक्तियों के बीच वास्तविक अन्तक्रियाओं का होना जरूरी है। संरचनावाद मानवता के उन नियमों की खोज करने पर बल देता है, जो कि मानव जीवन के समस्त स्तरों में पाए जाते हैं, चाहे वह स्तर जनजातीय जीवन का हो या आधुनिक और विकसित सामाजिक जीवन का हो । स्पष्ट है कि संरचनावाद बौद्धिक जगत की एक सामान्य विचार है। यही विचारधारा समाजशास्त्र में एक विशिष्ट विचारधारा है, जो कि निरन्तर संघ की प्रक्रिया में है।

संरचनावाद, उत्तर संरचनावाद और माइकल फोकाल्ट के विचारों के आधारों पर कहा जा सकता है कि उत्तर संरचनावाद की अवधारणा परम्परागत संरचनावाद  से भिन्न है। उत्तर संरचनावाद व्यक्तिनिष्ठता के स्थान पर वस्तुनिष्ठता को अंगीकार करता है। यह वर्तमान विश्व की समस्याओं के स्थान पर उत्तर आधुनिक समाज की समस्याओं में रुचि लेता है। यद्यपि संरचनावाद और उत्तर संरचनावाद दोनों ही भाषा विज्ञान को अपना आधार स्वीकार करते हैं फिर भी माइकल फोकाल्ट जैसे उत्तर संरचनावादियों ने सामाजिक  विश्लेषण के नए स्वरूप तथा आयाम प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने परम्परागत संरचनावाद में समुचित संशोधन और परिमार्जन करते हुए उसे समाजशास्त्र में पुनः स्थापित किया है।

 

 

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