उपग्रह/सैटेलाइट सम्प्रेषण क्या है?

उपग्रह/सैटेलाइट सम्प्रेषण क्या है?- SITE, INSAT | Satellite Based Education in Hindi

सैटेलाइट सम्प्रेषण(SATELLITE COMMUNICATION) 

दी सैटेलाइट अनुदेशन टेलीविजन एक्सपैरीमेण्ट (SITE) भारत सरकार द्वारा किया गया एक बड़े स्तर का प्रयोग था, जिसका उद्देश्य था- सैटेलाइट को अनुदेशिक उद्देश्यों की प्राप्ति से अगर 30 जुलाई 1976 तक दूरदर्शन, इन्डियन टेलीविजन अथोरिटी के साथ मिलकर ‘इन्डियन स्पेस रिसर्च संगठन’ (ISRO) ने एक सैटेलाइट के माध्यम से अनुदेशन टलावण प्रसारित किया ये मूलतः राजस्थान बिहार, उडीसा, मध्यप्रदेश तथा आन्ध्र प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिये ‘अन्तर्राष्ट्रीय दूरसंचार उपग्रह’ के सहयोग से प्रारम्भ हुये थे। ये प्रसारण लगभग 2400 गाँवों में हो रहे थे।

यह उपग्रह भूमध्य रेखा के कक्ष में लगभग 22300 मील की दूरी पर है। इस ऊंचाई पर यह उसू गति से घूमता है जो पृथ्वी के घूमने की गति है। ये उपग्रह वहाँ स्थिर हो जाते हैं और टी०वी० प्रसारण कन्द्रों की वहाँ से मदद करते हैं। ये उपग्रह दूरदर्शन कार्यक्रम मुख्यतः परिवार नियोजन कृषि, स्वास्थ्य, परिवार एवं मनोरंजन के लिये बनाये गये। वे एक गाँव या समुदाय हेतु तीस मिनट का होता था। ये प्रोग्राम चार भाषाओं में प्रसारित किये गये थे। प्रतिदिन लगभग चार घंटे का प्रसारण, प्रातः प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिये तथा शाम को अन्य लोगों के लिये किया जाता था।

“The SITE program were expected to transform rural communities by educating! them about various socio-economic schemes and enlarging the base of people’s involvement in development plans.”

वयस्क व्यक्तियों के लिये प्रसारित कार्यक्रम तीन प्रकार के थे-

1. राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं की खबरें।

2. विभिन्न विषयों से सम्बन्धित नवीनतम जानकारी तथा उन्नत विधियों के बारे में अनुदेशन।

3. कुछ शिक्षात्मक मनोरंजन के प्रोग्राम।

 

साइट (SITE) वास्तव में अन्तवैषयिक उपागम (Interdisciplinary System) की एक अपूर्व परियोजना थी जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय विकास तथा शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शन का प्रयोग था। इस परियोजना के तीन उद्देश्य रखे गये थे-

  1. उपग्रह के माध्यम से ग्रामीण विकास के लिये शिक्षण हेतु दूरदर्शन के प्रयोग में अनुभव प्राप्त करना।
  2. विकासशील देशों में उपग्रह दूरदर्शन प्रसारण की क्षमता का अध्ययन करना।
  3. ग्रामीण विकास में उपग्रह दूरदर्शन प्रसारण की क्षमता का प्रदर्शन करना साइट (SITE) के अन्तर्गत तीन प्रकार के लोगों के लिये शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किये गये-
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(a) प्राथमिक तथा पूर्व प्राथमिक स्तर के बालकों के लिये।

(b) प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के लिये।

(c) आम जनता के लिये।

 

सैटेलाइट सम्प्रेषण सामान्यतः जिओ स्टेशनरी (Geo-Stationery) होते हैं। दूसरे शब्दों में ये 24 घण्टें में पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगा लेते हैं। ये तश्तरी के आकार के अनेक एण्टीनाओं पर आधारित सम्प्रेषण हैं जो सैटेलाइट से विभिन्न माइक्रोवेव संकेतों को प्राप्त करते हैं अथवा भेजते रहते। ‘जिओ स्टेशनरी’ स्थिति में एक सैटेलाइट, पृथ्वी के लगभग एक तिहाई (1/3) भाग पर पूरी नजर रख सकता है। इनकी शक्ति को ‘सोलर’ (Solar) शक्ति द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

सैटेलाइट सम्प्रेषण के माध्यम से कम खर्च में काफी विशाल क्षेत्र तक सम्प्रेषण सम्भव होता है।

 

 

INSAT (इनसैट)

INSAT-1B तथा 6 मीडिया सेन्टर (Media Centers) की स्थापना ने भारतीय सैटेलाइट के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सम्प्रेषण की सम्भावनाओं पर काफी बल दिया है। 85 स्टेशनों के नेटवर्क के द्वारा यह भारत के 75% क्षेत्रों और 90% जनसंख्या तक पहुँच सकता है। INSAT-1B की स्थापना से विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किये जा रहे है।

Indian National Satellite का संक्षिप्त रूप INSAT कहलाता है। INSAT पहली बार 1983 में प्रयोग किया गया तथा इससे पूरे राष्ट्र में एक साथ टेलीविजन कार्यक्रम उपलब्ध कराये गये। पूरे राष्ट्र में प्रसारण हेतु एक माइक्रोवेब नैटवर्क लगाया गया। इनके द्वारा अनेक प्रकार के प्रोग्राम प्रसारित किये गये।

यू० जी० सी० ने इसका प्रयोग शिक्षा के छात्रों को विशेष सामग्री के प्रसारण के लिये करना शुरू किया। छठी पंचवर्षीय योजना में यू० जी० सी० द्वारा लगभग 1000 कॉलेजों को टेलीविजन सैट दिये गये। उच्च शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों के लिये भी प्रोग्राम प्रसारण प्रारम्भ हुआ। CIFL हैदराबाद तथा जामिया मिलिया दिल्ली को रेडियो व टेलीविजन सॉफ्टवेयर बनाने का कार्य दिया गया।

INSAT टेलीविजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों, युवकों तथा वयस्कों (प्रीढ़ों) के लिये शिक्षा के विकल्प उपागमों को प्रस्तुत करना था।

“The specific programmes were to emphasize direct teaching aiming to reduce the work load in classrooms and improve the quality of programmes through training of manpower. Besides education, INSAT broadcasts are devoted to economic development. These will cover general economic well being, social change, improvement in agriculture & irrigation and above all, national integration, communal harmony and secularism.”

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आज का युग सूचना-तकनीकी (Information Technology) का है। भारत इस युग में निरन्तर प्रगति पथ पर चल रहा है। आज उपग्रह संचार भी सूचनाओं का आदान-प्रदान बन गया है। भारत ने एक ओर संचार उपग्रह एपल के माध्यम से दूर संचार एवं डेटा संचार के क्षेत्र में अनेक प्रयोग किये, वहीं बहुउद्देशीय उपग्रह इंसेट के आधार पर मौसम विज्ञान एवं देशव्यापी दूरदर्शन व दूर-संचार का महत्त्वाकांक्षी अन्तरिक्ष कार्यक्रम तैयार किया है।

इंसेट-IA, अप्रैल 1982 में छोड़ा गया परन्तु कुछ खराबियों के कारण यह अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो सका। इसका कार्यकाल केवल पाँच माह ही रहा।

इन्सेट-IB, अगस्त 1983 के छोड़ा गया था, जिसने सफलतापूर्वक कार्य किया।

तीसरा यान INSAT I-C का निर्माण इन्सैट-IA की क्षतिपूर्ति करने के लिये किया गया। 1990 के दशक में INSAT-II श्रृंखला प्रारम्भ की गयी, जो दूरसंचार, दूरदर्शन और मौसम विज्ञान सम्बन्धी सूचनायें प्रदान करने में ज्यादा सक्षम हैं।

INSAT-IB यान पृथ्वी से 296 Km. की ऊँचाई पर भूस्थिर कक्षा में पृथ्वी की चाल से चाल मिलाकर इस प्रकार चक्कर काट रहा है कि हर समय पृथ्वी के एक ही स्थल विशेष के ऊपर बना रहता है। यह यान एक बुद्धिमान एन्टिना की भाँति, चित्र खींचकर पृथ्वी पर भेजता है, अंधकार में भी वस्तु को स्पष्ट देख सकता है तथा इसके चित्र भी प्रेषित करता है। दूरसंचार के 30 भू-केन्द्र तथा 2 चलिट टर्मिनल इससे जुड़े हैं।

इंसेट-IB की सहायता से रेडियो व दूरदर्शन के प्रसारणों से भारत के दूरदराज के रहने वाले लोग भी लाभान्वित हुये हैं।

एच० आर० डी० मिनिस्ट्री (H. R. D. Ministry), भारत सरकार तथा UNDP इन प्रोग्रामों को आर्थिक तथा अन्य रूपों में मदद दे रहे हैं।

 

 

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