कक्षा कक्ष का सामाजिक वातावरण

कक्षा कक्ष का सामाजिक वातावरण, कारक, शिक्षक की भूमिका | Social Climate of Class-room in Hindi

कक्षा कक्ष का सामाजिक वातावरण (Social Climate of Class-room) :

आज शिक्षा की मुख्य भूमिका समाज की गतिहीनता को जीवन्त बनाने, विकास और परिवर्तन करने, समाज निर्माण व मानव संसाधनों के विकास के लिए अत्यावश्यक अनुभव की जा रही है। हमें समाजवाद, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, अवसर की समानता व लोकतन्त्र के भावी नागरिकों की प्रतिबद्धता विकसित करनी है। इन भावी नागरिकों को उनकी शक्ति का बोध कराना, उन्हें उनके कर्त्तव्यों की जानकारी दिलाना व उनके दृष्टिकोण को वैज्ञानिक भी बनाना है। इन समस्त बिन्दुओं की आवश्यकता नई शिक्षा नीति में भी अनुभव की गई है।

समाज ने अपनी विविध आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विद्यालय के रूप में एक छोटा, सुन्दर, सुव्यवस्थित तथा सुसंस्कृत समाज बनाया है। विद्यालय एक आदर्श समाज है, अतः समाजोत्थान में विद्यालय की अहं भूमिका है, इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि कक्षा कक्ष का ऐसा सामाजिक वातावरण बनाया जाये, जो समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप नागरिकों का निर्माण कर सके।

 

कक्षा कक्ष के सामाजिक वातावरण का अर्थ और परिभाषा(Meaning & Definition of Social Climate) :

प्रत्येक कक्षा की अपनी व्यक्तिगत विशेषताएँ होती हैं। एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के सम्पर्क में आने से उसके गुणों व अवगुणों का अनुभव करता है। इसी प्रकार कक्षा में विद्यार्थी भी कक्षा के वातावरण से प्रभावित होकर कक्षा के गुणों व अवगुणों का अनुभव करते हैं। ब्लूम (1968) के अनुसार कक्षा का वातावरण (संस्थागत वातावरण) उन सभी परिस्थितियों एवं बाह्य शक्तियों का जाल है जो व्यक्ति को चारों ओर से घर रहती है तथा उस पर निरन्तर प्रभाव डालती रहती हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को नियन्त्रित एवं उसे एक निश्चित दिशा प्रदान करती हैं। कक्षा के मध्य छात्र तथा अध्यापक के बीच सामाजिक अन्त:क्रिया होती है और इसके परिणामस्वरूप जो वातावरण उत्पन्न होता है, उसे कक्षा कक्ष का सामाजिक वातावरण कहते हैं।

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ब्रेनर (1927) ने इसे सामाजिक वातावरण की संज्ञा दी। हर्बर्ट राइट (1951), परकिन्स (1951), गीजल्स (1960), विथाल (1965), काज एवं कॉन (1966), फ्लैण्डर्स (1967), मिसकल (1977) आदि ने कक्षा के सामाजिक वातावरण के ‘महत्त्व पर अत्यधिक बल दिया है। यदि एक अध्यापक छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो छात्रों में उस अध्यापक के प्रति दुर्भावना तथा तनाव पैदा होता है,परिणामस्वरूप कक्षा, विद्यालय तथा समाज का वातावरण दूषित हो जाता है। इसके ठीक विपरीत अध्यापकों का सद्व्यवहार छात्रों को अधिगम हेतु प्रेरित करता है तथा समाज के आदर्श वातावरण को बनाने में सहयोग देता है।

 

कक्षा कक्ष के सामाजिक वातावरण के कारक :

1. विद्यालय का स्थान – विद्यालय के आसपास सिनेमाघर, कारखाने, शराब की दुकानें, घनी बस्तियाँ, बाजार आदि ध्वनि प्रदूषण करने वाले तथा छात्रों को पथभ्रष्ट करने वाले कारक नहीं होने चाहिएँ।

2. छात्रों का सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक वातावरण।

3. कक्षा का भौतिक वातावरण,जैसे, हवा, प्रकाश, जल तथा फर्नीचर की समुचित व्यवस्था।

4 कक्षा कक्ष की सज्जा, जैसे, सुभाषित वाक्य, प्रेरणादायक महापुरुषों के चित्र, उद्बोधन एवं नीति-श्लोक आदि।

5. विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों का व्यक्तित्व तथा विषय पर अधिकार।

6. कक्षा हेतु निर्धारित पाठ्यक्रम तथा संस्था में उपलब्ध साहित्य।

7. शिक्षण की नवीन पद्धतियों तथा नवीन उपकरणों का प्रयोग।

8. सरकार द्वारा निर्धारित कक्षाकक्ष की नीतियाँ, जैसे, कक्षा में छात्रों की संख्या उपस्थिति अवकाश, छात्रवृत्ति, छात्रकोष, आर्थिक अनुदान, विद्यालयी स्तर से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक की जाने वाली गतिविधियाँ आदि।

9. छात्रों को रुचि, अभियोग्यता, सृजनात्मकता तथा सामाजिक चेतना।

10. विद्यालय संगठन, प्रबन्ध तथा उसकी दार्शनिक विचारधारा।

 

कक्षाकक्ष के सामाजिक वातावरण में शिक्षक की भूमिका :

1. शिक्षक पाठ की पूर्वतैयारी करके कक्षा में जाये ताकि वह विषय को ठीक ढंग से स्पष्ट कर सके।

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2. पाठ को रोचक बनाकर सभी छात्रों को सक्रिय रखे।

3. शिक्षण को नवीन तकनीकी, नवीन पद्धतियों एवं नवीन चुनौतियों से जोड़े।

4. शिक्षण के साथ-साथ छात्रों में मल्यों का विकास करे।

5. छात्रों में सामाजिकता की भावना हेतु सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करे।

6. छात्र में नकारात्मक संवेग न उत्पन्न होने दे बल्कि उनके मनोबल को बढ़ाये।

7. छात्र में आत्मसन्तोष, आशावादिता, नेतृत्व तथा नैतिक गुणों का विकास करे।

8. कक्षा को छोटे समूहों में विभक्त कर अंत:क्रिया तथा उत्तरदायित्व का अवसर प्रदान करे।

 

कक्षा कक्ष के सामाजिक वातावरण का मूल्यांकन :

(क) मौखिक एवं लिखित प्रतिक्रियाओं द्वारा,

(ख) साक्षात्कार द्वारा,

(ग) अवलोकन द्वारा,

(घ) समाजमिति परीक्षण द्वारा,

(ङ) बुद्धि परीक्षण द्वारा,

(च) क्रम निर्धारण मापनी द्वारा,

(छ) शैक्षिक तथा सहशैक्षिक प्रवृत्तियों के परिणाम के आधार पर।

 

 

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