वार्तालाप नीति तथा समीक्षा नीति की विशेषताएँ

वार्तालाप नीति तथा समीक्षा नीति की विशेषताएँ, सीमाएँ, सुझाव | Discussion Strategy in Hindi

वार्तालाप नीति (DISCUSSION STRATEGY)

ली (Lee) के अनुसार वार्तालाप नीति “शैक्षिक समूह क्रिया है। इसमें छात्र सहयोगपूर्वक एक-दूसरे से किसी समस्या पर विचार करते हैं।“ (Discussion is an educational group activity in which the teacher and the students cooperatively talk over some problem or topic)| इस नीति में कोई एक विषय ले लिया जाता है और शिक्षक उस विषय पर छात्रों को वार्तालाप या वाद-विवाद करने के लिए प्रेरित करता है। यह नीति शिक्षण एवं छात्र में अन्तःप्रक्रिया के अवसर बढ़ाती है। इस विधि की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि छात्रों को अपने विचार प्रकट करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिये। वार्तालाप नीति में सभी छात्रों को बोलने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिये किंतु शिक्षक एक निरीक्षक तथा निर्देशक के रूप में काम करता रहता है। वार्तालाप नीतियाँ तीन प्रकार की होती हैं

 

 

वार्तालाप नीतियों के प्रकार (FORMS OF DISCUSSION STRATEGIES)

1. औपचारिक (Formal)

2. अनौपचारिक (Informal)

3. संरचनाकृत (Structured)

 

वार्तालाप नीति के प्रकार

 

औपचारिक वार्तालाप

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तथा उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु औपचारिक वार्तालाप का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के वार्तालाप के अपने निर्धारित नियम तथा सिद्धान्त होते हैं। (It is a formal discussion controlled by the teacher through questions and answers)| यह शिक्षक और छात्रों के मध्य होता है।

अनौपचारिक वार्तालाप

इसमें निर्धारित नियम तथा सिद्धान्तों का प्रयोग नहीं होता है। दूसरे शब्दों में अनौपचारिक वातालाप में भाग लेने वाले किसी भी नियम से नहीं बँधे होते हैं। (It is informal, voluntary participation under guidance) यह शिक्षक तथा छात्रों एवं छात्र-छात्र के मध्य हो सकता है।

 

‘वज’ वार्तालाप

These are short, structured, purposeful ‘buzz’ sessions with small groups followed by reporting to the whole class on some specific questions.

 

सार्थक संरचनाकृत सामान्य वार्तालाप

These are purposeful structured group discussion followed by reporting to the whole class and followed by general discussion.

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शिक्षण बिन्दुओं पर वार्तालाप

This is a group discussion with definite points of discussion.

वार्तालाप नीति के माध्यम से छात्रों के व्यवहार (उनके सम्प्रेषण, अभिवृत्तियों, मूल्यों, सामाजिक विकास आदि) में वांछित परिवर्तन लाया जाता है।

 

 

वार्तालाप विधि की विशेषताएँ

(1) इसमें गलत उपागमों (Wrong Approaches) को अनुत्साहित किया जाता है।

(2) छात्रों में आत्मविश्वास जाग्रत होता है।

(3) छात्रों की अभिवृत्ति के विकास में सहायक है।

(4) छात्रों को ध्यानपूर्वक सुनने और उचित उत्तर देने के लिए प्रेरित करती है।

(5) शिक्षक तथा छात्र परस्पर निकट आते हैं और एक-दूसरे को भली-भाँति समझते हैं।

(6) ये छात्रों को सक्रिय बनाती है।

(7) छात्रों की सृजनात्मक विशेषताओं को बढ़ाती है।

(8) यह जनतान्त्रिक नीति है।

(9) इसमें सामाजिक-अधिगम के अधिक अवसर प्राप्त होते हैं।

(10) इससे ज्ञानात्मक तथा भावात्मक पक्षों के उच्च उद्देश्यों को प्राप्त किया सकता है।

(11) इससे तर्कशक्ति बढ़ती है, ज्ञान बढ़ता है तथा अपनी बात कहने का कौशल विकसित होता है।

 

 

वार्तालाप विधि की सीमाएँ

(1) सभी छात्र समान रूप से बोल नहीं पाते।

(2) छात्रों में कभी-कभी ईर्ष्या तथा स्पर्धा जगा देती है।

(3) छात्र कभी-कभी विषय से काफी दूर चले जाते हैं।

(4) अनावश्यक आलोचना या बाल की खाल निकालने वाले लोग इसके उद्देश्य को नष्ट कर सकते हैं।

 

 

वार्तालाप विधि के लिए सुझाव

(1) सभी छात्रों को बोलने के लिए समान अवसर प्रदान किये जायें।

(2) न बोलने वाले छात्रों को आगे लाया जाये।

(3) छात्रों को विचारोत्तेजक प्रश्न पूछ-पूछ कर वार्तालाप के लिए तैयार करना चाहिये।

(4) वार्तालाप का प्रकरण पारस्परिक विचार विनियम से तय करना चाहिये।

(5) केवल रचनात्मक एवं सार्थक आलोचनाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिये।

(6) जहाँ तक हो सके विवादास्पद विषयों की उपेक्षा करनी चाहिये।

(7) शिक्षक को सक्रिय नियन्त्रक का कार्य करना चाहिये।

(8) वार्तालाप सदैव सार्थक तथा उद्देश्ययुक्त होना चाहिये।

 

समीक्षा नीति(REVIEW STRATEGY)

रिव्यू को हिन्दी में पुनरावलोकन या समीक्षा भी कहा जाता है। इसका मतलब ‘फिर से अपने विचार करने, तथ्यों को स्मरण करने, उनकी समीक्षा करने तथा महत्त्वपूर्ण निष्कर्षों पर पहुंचने से है।’ रिव्यू के माध्यम से शिक्षक अपने पाठ को तैयार कर पुनः प्रमुख बिन्दुओं पर विचार करता है और यह जानने का प्रयास करता है कि कौन-सा प्रकरण छात्रों के लिए अधिक उपयोगी है, कितने पाठ पढ़ा दिये गये हैं और कितने शेष रह गये हैं। ‘रिव्यू’ शिक्षक को यह भी बताता है कि उसके शिक्षण में क्या-क्या दोष हैं और उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है।

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लारेंस उर्डेंग (Laurance Urdang) के अनुसार-

“Review is the process of going over a subject again in study or recitation in order to fix it in the memory or summarize the facts, criticism imply carefully examining something, making a judgement and putting the judgement into written from.”

 

‘रिव्यू'(Review)को सामान्यतया निम्न वर्गों में बाँटा जाता है-

 

समीक्षा नीति

 

 

रिव्यू या समीक्षा नीति की विशेषताएँ

(1) उच्च कक्षाओं के लिए प्रभावकारी है।

(2) इसके माध्यम से शिक्षक अपने उद्देश्य प्राप्ति में सफल हो जाते हैं।

(3) यह ज्ञान को स्थायी बनाने में सहायक है।

(4) इसमें अनौपचारिकता ज्यादा रहती है।

(5) किसी भी तथ्य की समीक्षा की जा सकती है।

(6) छात्र और शिक्षक दोनों ही सक्रिय रहते हैं।

(7) छात्रों में विश्लेषण-संश्लेषण की क्षमताओं का विकास होता है।

(8) छात्रों को पुस्तकालय में पढ़ने की आदत विकसित होती है।

(9) शोध-कार्यों में यह अत्यन्त उपयोगी है।

(10) छात्र स्वतन्त्र रूप से पढ़ने लगते हैं।

(11) आन्तरिक मूल्यांकन में उपयोगी है।

 

 

रिव्यू या समीक्षा नीति की सीमाएँ

(1) निम्न कक्षाओं में अनुपयोगी है।

(2) समय ज्यादा लगता है।

(3) शिक्षक के निर्देशन पर छात्र निर्भर रहते हैं।

(4) सभी प्रकार की मानसिक योग्यता वाली कक्षा के लिए अपेक्षाकृत कम उपयोगी है।

 

 

 

रिव्यू या समीक्षा नीति के लिए सुझाव

(1) छात्रों को योग्यतानुसार रिव्यू के विभिन्न प्रकरण दिये जायें।

(2) रिव्यू का समय भी निश्चित होना चाहिये।

(3) रिव्यू के उद्देश्य निश्चित किये जाने चाहिये कि रिव्यू क्यों किया जा रहा है।

(4) रिव्यू के लिए पाठ्य-वस्तु/प्रकरण देते समय सन्दर्भ ग्रन्थों की प्राप्ति भी ध्यान में रखनी चाहिये।

(5) रिव्यू छात्रों के कार्यों का भी किया जाना चाहिये – साथ ही शिक्षक के भी कार्यों का रिव्यू होना चाहिये।

 

 

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