कार्यशाला क्या होता हैं?, अर्थ एवं परिभाषा

कार्यशाला क्या होता हैं?, अर्थ एवं परिभाषा, उद्देश्य, विशेषताएँ एवं सीमाएँ | Workshop in Hindi

कार्यशाला क्या होता हैं? (Workshop)

शिक्षा के उद्देश्य मुख्यतः तीन पक्षों से सम्बन्धित होते हैं, ये पक्ष है- ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा क्रियात्मक। ज्ञानात्मक तथा भावात्मक पक्षों की दृष्टि से उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु शिक्षण प्रविधियों में से विचारगोष्ठी, सम्मेलन तथा संगोष्ठी और परिचर्चा आदि का आयोजन किया जाता है। क्रियात्मक पक्ष की दृष्टि से उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु जिस शिक्षण प्रविधि का प्रयोग करते है, उसे ‘कार्यशाला‘ कहते हैं। कार्यशाला शब्द का प्रयोग मुख्यतः अभियान्त्रिकी (Engineering) की देन है जिसमें हस्त-कार्य पर अधिक बल दिया जाता है।

 

कार्यशाला का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of workshop) :

कार्यशाला में छात्र विचार-विमर्श के साथ-साथ सामूहिक रूप से रचनात्मक कार्य भी करते है, तह जिस प्रकार विचार-गोष्ठी में ज्ञानात्मक पक्ष पर अधिक ध्यान दिया जाता है, उसी प्रकार कार्यशाला में कार्यात्मक पक्ष पर अधिक बल दिया जाता है। यह एक किया है। इसमें स्वयं प्रायोगिक कार्य सम्भागियों द्वारा किया जाता है, अत: उन्हें समस्या का गहनतम ज्ञान हो जाता है।

डॉ. पी. सिंह के अनुसार, “कार्यशाला एक ऐसा व्यक्तिशः सम्पर्क का आधारमत समह या वर्ग है जिसमें व्यक्तियों को सामाजिक नियन्त्रण द्वारा प्रभावित करने हेतु अधिकाधिक घनिष्ठ एवं प्रत्यक्ष सामाजिक अन्तःक्रिया सम्पन्न होती है।”

 

कार्यशाला के उद्देश्य (Objectives of Workshop) :

कार्यशाला में संभागी अपने विचारों के आदान-प्रदान, कार्यक्रम की रूपरेखा तथा। कार्यक्रम की सफलता के मूल्यांकन हेतु सम्मिलित होते हैं। इसके मुख्यतः निम्नलिखित उद्देश्य हैः

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1. सहयोग की भावना का विकास करना।

2. सृजनात्मकता का विकास करना।

3. लोकतंत्रात्मकता का विकास करना।

4. विशेषज्ञों के अनुभवों से तथा नवीनतम साहित्य से परिचित कराना।

5. सेवारत अध्यापकों की व्यावसायिक एवं प्रशासनिक क्षमताओं में वृद्धि करना।

6. शिक्षकों की समय-समय पर आने वाली समस्याओं का निवारण करना।

7. शिक्षण की प्रभावशाली विधियों तथा प्रविधियों का निर्धारण करना।

8. विषय से सम्बन्धित सैद्धान्तिक ज्ञान को व्यवहार में लाने की क्षमता का विकास  करना।

 

 

कार्यशाला की कार्यविधि :

कार्यशाला प्रारम्भ करने से पूर्व कार्यशाला के नेता का चयन, सन्दर्भ, व्यक्तियों की व्यवस्था तथा सम्भागियों का निर्धारण किया जाता है। कार्यशाला के उद्देश्यों के निर्धारण के साथ-साथ जिस सामग्री का निर्माण करना है, उसकी सूची बना ली जाती है।

इसमें प्रमुख रूप से तीन सोपानों का अनुसरण किया जाता है :

 

(1) प्रस्तुतीकरण:

(क) सर्वप्रथम विषय का सैद्धान्तिक ज्ञान विशेषज्ञ द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

(ख) सैद्धान्तिक ज्ञान हेतु व्याख्यान की अपेक्षा सामूहिक विचार-विमर्श किया जाता है।

(ग) विचार-विमर्श के समय उत्पन्न शंकाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया जाता

 

(2) क्रियान्वयनः

कार्यशाला की प्रस्तुतीकरण की अवस्था (जिसे सैद्धान्तिक चर्चा की अवस्था भी कहा जा सकता है) के बाद पूरे समूह को छोटे छोटे समूहों में बाँट दिया जाता है। जिसमें वे स्वतन्त्र रूप से चिन्तन करते हैं। इसमें समूह का नेता अपने विचारों को समूह पर थोपने की अपेक्षा उन्हें सुझाव एवं मार्गदर्शन देता है ताकि वे विषय पर कहीं एकमत होकर किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकें। जिन बिन्दुओं पर मतभेद रहता है,उन पर पुनः विचार किया जाता है तथा यह प्रयत्न रहता है कि समूह के सदस्य किसी निष्कर्ष तक पहुंचा सकें।

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इस सोपान के अन्त में प्रत्येक समूह अपनी गतिविधियों का प्रतिवेदन तैयार करते हैं, जिनको समस्त सम्भागियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

 

 

कार्यशाला का मूल्यांकन :

कार्यशाला की सफलता ज्ञात करने हेतु संदर्भ व्यक्ति अथवा विशेषज्ञ संभागियों की लिखित परीक्षा लेते हैं । अभिरुचि एवं अभिवृत्ति के मूल्यांकन हेतु स्तर मापनी (Rating Scale) का प्रयोग किया जाता है। कार्यशाला में प्रायोगिक कार्य करवाया जाता है, अतः मूल्यांकन हेतु किये गये कार्य का नमूना भी सम्भागी से बनवाया जा सकता है ।

 

कार्यशाला की विशेषताएँ (Characteristics of Workshop) :

1. इससे मिलकर कार्य करने की भावना व सामाजिक गणों का विकास होता है।

2. यह स्वयं करके सीखने तथा व्यावहारिक ज्ञान पर अधिक बल देती है।

3. इससे छात्रों में अच्छा प्रदर्शन करने की अभिप्रेरणा तथा प्रतिस्पर्द्धा की भावना का विकास होता है।

 

कार्यशाला की सीमाएँ (Limitations) :

1. इसमें अधिक धन, समय व श्रम की आवश्यकता होती है ।

2. अनुभवी विशेषज्ञों का अभाव रहता है।

3. इसके द्वारा समस्त विषयों पर चर्चा नहीं की जा सकती।

4. संभागियों में परस्पर सहयोग का अभाव रहता है।

 

 

 

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