शिक्षण युक्तियाँ तथा शिक्षण नीतियों का वर्गीकरण

शिक्षण युक्तियाँ तथा शिक्षण नीतियों का वर्गीकरण, अन्तर | Teaching Tactics in Hindi

शिक्षण युक्तियाँ(TEACHING TACTICS)

शिक्षण युक्तियों (Teaching Tactics) से हमारा तात्पर्य “अनुदेशन के विस्तृत पक्षों से है, जो व्यूह रचना की अपेक्षा ज्यादा समावेशित होते हैं। शिक्षण की समान युक्तियाँ, शिक्षण की विभिन्न नीतियों में प्रयोग की जा सकती हैं।”

शिक्षण युक्तियों के कुछ उदाहरण हैं-अपेक्षित अनुक्रिया के लिये उद्दीपन प्रस्तुत करना, सही अनुक्रिया का पुनर्बलन करना, अनुक्रियाओं को सीखने के क्रम में रखना, सीखी अनुक्रियाओं का अभ्यास कराना, विभेदीकरण की परिस्थितियाँ उत्पन्न करना, सामान्यीकरण, उदाहरण-नियम प्रत्यय आदि का प्रयोग करना।

‘शिक्षण युक्तियाँ, वे सारी प्रविधियाँ हैं जिनका प्रयोग शिक्षक अपने शिक्षण को प्रभावपूर्ण, रुचिकर तथा स्पष्ट बनाने के लिए करता है। ये युक्तियाँ शाब्दिक (Verbal) तथा अशाब्दिक (Non-Verbal) दोनों तरह की होती हैं। इनका उपयोग शिक्षक कक्षा की परिस्थितियों तथा आवश्यकतानुसार करता है। शिक्षक युक्तियाँ छात्रों और शिक्षकों के मध्य अन्तःप्रक्रिया को प्रभावशाली बनाती हैं।

स्टोन्स तथा मौरिस(Stones &Morris) के अनुसार “शिक्षण युक्तियाँ उद्देश्यों से सम्बन्धित होती है और शिक्षक के व्यवहार को प्रभावित करती हैं। शिक्षक किसी परिस्थिति विशेष में कैसा व्यवहार करता है, कैसे वह कक्षा में अन्तःप्रक्रिया होती है आदि बातें इसमें आती हैं। छात्रों के साथ विभिन्न भूमिकाओं में कार्य को पूरा करता है और कैसे छात्र, शिक्षक तथा पाठ्य-वस्तु में अन्तःप्रक्रिया होती है आदि बातें इसमें आती हैं।”

“Teaching tactic is goal linked influenced or influencing behavior of the teacher. It includes the way he behaves in the instructional situations and how he fulfills various instructional roles with the students of the class and how the teacher, the students and the subject matter interacts.”

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शिक्षण-उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षण युक्तियाँ एक सबल माध्यम हैं। ये सदैव उद्देश्यों से सम्बन्धित रहने वाली सार्थक प्रविधियाँ हैं। एक शिक्षक के लिए आवश्यक है कि वह शिक्षण युक्तियों के चयन में बहुत अधिक जागरुक रहे। निम्नांकित सारणी शिक्षण युक्तियों तथा शिक्षण नीतियों का अध्ययन करने में सहायता देती है।

 

 

शिक्षण नीतियाँ तथा शिक्षण युक्तियाँ में अन्तर

 

शिक्षण नीतियाँ (Teaching Strategies) शिक्षण युक्तियाँ (Teaching Tactics)
1. ये शिक्षण की विस्तृत अध्यापन विधि है। 1. शिक्षण युक्तियाँ, शिक्षण नीति के अधीन है।
2. ये शिक्षण विधियों के अनुरूप हो सकती हैं। 2. ये शिक्षण प्रविधियों के अनुरूप हैं।
3. एक शिक्षण नीति में कई यक्तियों का प्रयोग किया जाता है। 3. एक या कई युक्तियाँ सम्मिलित रूप से शिक्षण नीति को प्रभावशाली बनाती हैं।
4. ये सामान्य स्वरूप की होती हैं। 4. इनका अपना विशिष्ट स्वरूप होता है।
5. ये शिक्षण व्यवस्था को उन्नत बनाती हैं। 5. ये नवीन ज्ञान को स्थायी धारणा देती हैं।

 

 

डेविस (Davis) महोदय का यह कथन सत्य है कि शिक्षण की युक्तियाँ, विधियाँ आदि शिक्षण नीतियों के विभिन्न अंग हैं। शिक्षण-नीति, आधारशिला है। समस्त शिक्षा नियोजन के लिये विभिन्न शिक्षण नीतियों को प्रयोग में लाना होता है सम्बन्धित युक्तियों और विधियों का चयन करना होता है। सच है “पूर्व नियोजन ही सफल शिक्षण की कुंजी है और पूर्व नियोजन में शिक्षण नीति, रीति, विधि व युक्ति सभी की भूमिका रहती है।

 

 

शिक्षण-नीतियों का वर्गीकरण

(CLASSIFICATION OF TEACHING STRATEGIES)

कक्षा के वातावरण, कक्षा की परिस्थितियाँ तथा शिक्षक के दृष्टिकोणों के आधार पर शिक्षण नीतियों को प्रमुख रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(1) जनतान्त्रिक शिक्षण नीतियाँ (Democratic Strategies),

(2) प्रभुत्ववादी शिक्षण नीतियाँ (Autocratic Strategies)|

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(1) जनतान्त्रिक शिक्षण नीतियाँ (Democratic Strategies)-

जनतान्त्रिक शिक्षण नीतियाँ जनतन्त्र के मूल्यों पर आधारित रहती हैं। ये नीतियाँ बाल-मनोविज्ञान का प्रयोग कर शिक्षण को बाल-केन्द्रित (Child centered) बनाती हैं। इन नीतियों में प्रमुख स्थान बालकों या छात्रों को दिया जाता है। शिक्षक का स्थान गौण रहता है। इसमें शिक्षक छात्रों की आयु, परिपक्वता, मानसिक योग्यताओं, रुचि, सामर्थ्य तथा क्षमताओं आदि के आधार पर अपने शिक्षण कार्य की व्यवस्था करते हैं। इसमें छात्र अपने विचारों को व्यक्त करने में स्वतन्त्र होते हैं। इस प्रकार की जनतान्त्रिक शिक्षण नीतियों छात्रों में स्वतन्त्र रूप से चिन्तन करने तथा उनकी कल्पना, तर्क, निर्माण तथा सृजन आदि क्षमताओं का विकास करने में महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं। छात्र स्मृति स्तर से प्रारम्भ कर अपने ज्ञान को चिन्तन स्तर तक ले जाकर समस्याओं के समाधान में सफलता प्रदान करते हैं।

 

यह नीति छात्रों में सामाजिक विकास करती है और उन्हें ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा गत्यात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता देती है। इस प्रकार की नीतियों में प्रमुख नीतियाँ हैं-वाद-विवाद, अन्वेषण, समीक्षा, योजना पद्धति, गृहकार्य, मस्तिष्क हलचल, स्वतन्त्र अध्ययन, अभिनय, संवेदनशील प्रशिक्षण आदि।

 

 

(2) प्रभुत्ववादी शिक्षण नीतियाँ (Autocratic Strategies)-

प्रभुत्ववादी शिक्षण नीतियाँ प्रभुत्ववाद या निरंकुशवाद के मूल्यों पर आधारित रहती हैं। इन नीतियों में शिक्षक अधिक सक्रिय रहता है और छात्र निष्क्रिय बैठे रहते हैं। ये नीतियाँ शिक्षक प्रधान (Teacher Centered) होती हैं। इसमें छात्र शिक्षक की प्रत्येक बात, विचार तथा दर्शन बिना किसी तर्क के स्वीकार कर लेते हैं। शिक्षक स्वयं पाठ्य-वस्तु का निर्धारण अपने आदर्शों तथा रुचियों के आधार पर करता है। छात्रों की आवश्यकताओं और उनकी मनोवैज्ञानिक पृष्ठभूमि का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखता। यह शिक्षण स्मृति स्तर पर ही होता है और इनके माध्यम से केवल ज्ञानात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति सरलता से होती है। इन नीतियों के प्रयोग से कक्षा का वातावरण पूर्णतः औपचारिक रूप ग्रहण कर लेता है। प्रभुत्ववादी शिक्षण नीतियों में प्रमुख नीतियाँ हैं- व्याख्यान, पाठ प्रदर्शन, ट्यूटोरियल, अभिक्रमित अनुदेशन आदि।

विभिन्न प्रकार की शिक्षण नीतियाँ (Various Types of Teaching Strategies)-आगे के पृष्ठों में कुछ महत्त्वपूर्ण शिक्षण नीतियों का विवरण दिया गया है। इन नीतियों का प्रयोग शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सावधानीपूर्वक शिक्षक को करना चाहिये।

 

 

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