भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता ‘अनेकता में एकता’ है। भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। भारत में कुछ ऐसे त्योहार हैं जो समान रूप से पूरे देश में मनाये जाते हैं। लेकिन कुछ त्योहार और मेले ऐसे हैं जो किसी क्षेत्र अथवा राज्य विशेष में मनाये जाते हैं, जैसे-वैशाखी और पोंगल। वैशाखी पंजाब में तथा पोंगल तमिलनाडु में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
इसी तरह दक्षिण भारत में एक राज्य है केरल, जहाँ एक विशेष त्योहार मनाया जाता है – ‘ओणम्’। यह त्योहार अगस्त-सितम्बर के महीनों में मनाया जाता है। लगातार तीन महीनों की वर्षा के बाद आकाश स्वच्छ और चमकीला नीला हो जाता है। तालाबों, झीलों, नदियों एवं झरनों में जल की बहुतायत हो जाती है। कमल और लिली के पुष्प खिलकर महक उठते हैं। हरे-भरे खेतों का दृश्य इस पर्व को मनाने में विशेष योगदान देता है। श्रावण मास में यह त्योहार मनाया जाता है। मलयालम में इस माह को ‘चिंगमासम्’ कहा जाता है। यह मलयालम कैलेण्डर का पहला महीना होता है।
प्रत्येक त्योहार के साथ कोई न कोई कथा जुड़ी रहती है। इसके सम्बन्ध में भी एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। महाबलि नाम के एक राजा केरल में राज करते थे। वे एक आदर्श और न्याय प्रिय राजा थे। वे अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते था। उनके राज्य में प्रजा बहुत प्रसन्न और सन्तुष्ट थी। राजा महाबलि बहुत दानी था प्रजा उन्हें भगवान मानकर उनकी पूजा करती थी।
देवताओं से उनकी लोकप्रियता देखी न गयी। उन्होंने एक षड्यन्त्र रचा देवताओं के राजा इन्द्रदेव के अनुरोध पर भगवान विष्णु वामन भेष बनाकर; राजा महाबलि के पास आये और तपस्या करने के लिए तीन पग भूमि दान माँगी। भगवान विष्णु ने पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में सम्पूर्ण आकाश नाप लिया। अब तीसरे पग के लिए महाबलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने महाबलि को पाताल लोक में रहने की आज्ञा सुनाई। महाबलि की प्रार्थना पर भगवान विष्णु प्रसन्न होकर उन्हें वर्ष में एक बार धरती पर अपने राज्य में आने का आशीर्वाद दिया।
कहा जाता है कि हर वर्ष श्रावण मास में राजा महाबलि अपनी प्रजा को देखने आते हैं, श्रवण नक्षत्र को मलयालम में ओणम् नक्षत्र कहते हैं। ओणम् केरल का एक .’ प्रमुख त्योहार है। यह उत्सव दस दिनों तक चलता है। उत्सव धिक्कारा (कोच्चि के पास) केरल के एक मात्र वामन मन्दिर से प्रारम्भ होता है। ओणम् में प्रत्येक घर के आँगन में फूलों की पंखुड़ियों से सुन्दर रंगोलियाँ (पूक्कालम) डाली जाती हैं।।
युवतिया उन रंगोलिया के चारों तरफ वृत्त बनाकर उल्लास पूर्वक नृत्य (तिरुवाथिरा कलि) करती हैं। इस पूक्कालम का प्रारंभिक स्वरूप पहले दिन तो छोटा होता है। परन्तु हर रोज इसमें फूलों का एक और वृत्त बढ़ा दिया जाता है। इस तरह बढ़ते-बढ़त दसवें दिन यह पूक्कालम वृहत् आकार धारण कर लेता है। इस पुक्कालम के बीच त्रिक्काकरप्पन अर्थात् वामन अवतार में भगवान विष्णु, राजा महाबलि तथा उनके अंग-रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है। जो कच्ची मिट्टी से बनाई जाती है। बच्चे, जवान तथा बूढ़े सभी इस दिन की बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा करते हैं। लोग नये-नये वस्त्र पहनते हैं, गीत, संगीत तथा अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। मन्दिरों में उत्सव होते हैं। ओणम् के अवसर पर नौका दौड़ तथा हाथियों का जुलूस लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
ओणम् के इस पवित्र दिन पर धनी लोग गरीबों को खुलकर दान देते हैं। इस दिन लोक नृत्य भी होते हैं। कत्थकली नृत्य केरल का लोकप्रिय नृत्य है। युवतियाँ सफेद साड़ियाँ पहनती हैं और बालों पर फूलों की बेणियाँ सजाकर नाचती हैं।
ओणम् के दिन भोजन में विविध प्रकार के व्यंजन और पकवान सम्मिलित रहते हैं जिन्हें ओणम सद्या कहते हैं। इनमें 26 प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं जिनमें । चावल, दाल, पापड़, सांभर, खिचड़ी, उप्पेरी (पकौड़ी) पायसम् (खीर) आदि मुख्य हैं। धान, नारियल और केला केरल की मुख्य उपजें हैं। मध्याह्न काल में सब एक। साथ बैठ कर केले के पत्ते पर भोजन करते हैं। केले के पत्ते पर भोजन करना अत्यन्त पवित्र माना जाता है। ओणम् का त्योहार सभी धर्मों के लोगों द्वारा परस्पर प्रेम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 10-12 दिनों तक चलने वाला यह त्योहार हर्षोल्लास के साथ पूर्ण होता है। इस रंग-बिरंगे अनोखे त्योहार में पूरा केरल चमक उठता है।
त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान एवं संस्कृति के पोषक होते हैं।
Disclaimer -- Hindiguider.com does not own this book, PDF Materials, Images, neither created nor scanned. We just provide the Images and PDF links already available on the internet or created by HindiGuider.com. If any way it violates the law or has any issues then kindly mail us: 24Hindiguider@gmail.com